कैसे सुनते हैं?

हम कैसे सुनते हैं?

जो आवाज हमारे कानों तक पहुँचती हैं, पहले वह कान के पर्दो में कंपन पैदा करती हैं। यह कपन तीन छोटी हड्डियों के द्वारा कानों के मध्य भाग (middle ear) मध्य कर्ण, (hammer) हॅंमर, (anvil) एनविल एवं स्टियरअपसे गुजर कर cochlea कॉकलियॉ तक पहुँचती हैं। इसका परिणाम कॉकलियॉ के द्रवों में गतिमय होता हैं। कॉकलियॉ के अन्दर संवेदनशील कोशिकाएँ (sensitive cells) होती हैं, जो कि इन गति को नोट कर लेती हैं और न्यूरल क्रियाओं (neural activity) की शुरुआत करती हैं जो कि ऑडिटरी नर्व के द्वारा दिमाग तक पहुँचायी जाती हैं। इस प्रकार से हम सुनते हैं।

हम कैसे बोलते हैं?

बोलना एक विस्तृत प्रक्रिया हैं। वह संरचनाएँ जिनका उपयोग, चूसने, काटने, चबाने एवं निगलने के लिए किया जाता हैं, वही बोली के उत्पादन में उपयोगी लायी जाती हैं। गले में स्थित स्वर यंत्र (vocal cords), जो कि फेफडों में किसी बाहरी वस्तु के जाने को रोकने के लिए बनायी गयी हैं, उसका उपयोग आवाज निकालने में किया जाता हैं। फेफडों से बाहर निकाली गयी हवा का उपयोग कठ ध्वनि में कंपन पैदा करने के लिए जिससे कि आवाज पैदा हैं, किया जाता हैं। आवाज उसी तरह पैदा होती हैं, जैसे कि एक गुब्बारा आवाज पैदा करता हैं, जब उसका मुँह चौडा किया जाता हैं। इस प्रकार वे संरचनाएँ जो कि साँस लेने एवं खाने कि लिए किया जाता हैं। हालाकि, दिमाग इन सबका मुख्य नियंत्रक (master controller) हैं। बोलना एक साँस लेने की, अभिव्यक्त करने की एवं ध्वनि निकालने की नियंत्रित प्रक्रिया हैं।
बोलना उन आवाजों को कहते हैं जो कि मुँह से निकाली जाती हैं एवं शब्दों का स्वरूप लेती हैं। बोलने के लिए बहुत सी चीज़ों का क्रम में होना जरूरी हैं, जैसे कि :
  • अगर दिमाग किसी से संवाद स्थापित करना चाहता हैं तो दिमाग में विचार /बात आनी चाहिए।
  • दिमाग की बात को मुख तक भेजना जरूरी हैं।
  • दिमाग का मुख को बोलना जरूरी हैं कि किन शब्दों को कहा जाना हैं और उन शब्दों के लिए किस प्रकार की आवाज निकाली जाए।
  • उच्चारण एवं बोलने के पैटर्न को सम्मिलित किया जाना चाहिए।
  • दिमाग का जबडों के पसलियों को उचित संदेश भेजना भी ज़रूरी हैं, उन पसलियों को जो कि आवाज पैदा करती हैं एवं जीभ, होठ एवं जबडों को नियंत्रित करती हैं।
  • इन पसलियों में मजबूती एवं दिमाग द्वारा नियंत्रित होने की क्षमता होनी चाहिए।
  • फेफडों में पर्याप्त हवा होनी चाहिए एवं छाती की पसलियाँ पर्याप्त रूप से मजबूत होनी चाहिए ताकि वोकल कॉर्ड (vocal cords) में कंपन पैदा कर सकें। हवा का अन्दर नहीं, बाहर जाना, उपयोगी संवाद के लिए जरूरी हैं।
  • वोकल कॉड्‌र्स का अच्छी हालत में होना जरूरी हैं ताकि भाषण स्पष्ट हो एवं जोर से सुना जा सके।
  • बोले गए शब्द हमारी श्रवण-शक्ति द्वारा परखे जाते हैं। यह बोले गए शब्दों के पुनर्विचार परिस्थिति के लिए नए शब्द सीखने में मदद करता हैं। अगर बोले गए शब्द ठीक से नहीं सुने जाते हैं,तो वाचा की पुनर्निमिती के समय बोलने में गडबडी होगी ।
  • दूसरा व्यक्ति हमारें साथ संवाद इच्छुक होना चाहिए एवं सुनने के लिए राजी होना चाहिए।
अगर पर्याप्त रूप से उत्तेजना उपलब्ध हो तो लगभग सभी बच्चों के लिए, ये प्रक्रियाएँ प्राकृतिक रूप से होती हैं।
कुछ बच्चों के लिए यह प्राकृतिक क्रम टूट जाता हैं। एक बार अव्यवस्था की जड पता चल जाए तो, इन क्रमों को सीधे एवं इच्छा शक्ति द्वारा सुधारा जा सकता हैं।
श्रवणविकलांगता क्या है?
किसी व्यक्ति द्वारा पूरी तरह से आवाज सुनने में अक्षम होना श्रवण -विकलांगता कहलाता हैं। यह श्रवण यंत्रणा के अपर्याप्त विकास के कारण, श्रवण संस्थान की बीमारी या चोट लगने की वजह से हो सकता हैं। सुनना, सामान्य वाचा एवं भाषा के विकास के लिए ‘सुनना ‘, यह प्रथम आवश्यकता हैं। बच्चा, परिवार या आसपास के वातावरण में लोगों की बोली सुनकर ही बोलना सीखता हैं।
बधिरता एक अदृश्य दोष हैं। एक व्यक्ति या बच्चे के बहरेपन को पहचानने के लिए सूक्ष्म निरीक्षण की आवश्यकता होती हैं। जन्म के समय एवं शैशवावस्था में बहरापन बच्चे के संपूर्ण विकास में गलत प्रभाव डालता हैं। यह प्रभाव, विकलांगता की प्रभाव भिन्नता प्रारम्भिक आयु, स्वरूप और श्रेणी पर निर्भर हैं।

श्रवणविकलांगता के प्रकार

1. चालकीय श्रवण दोष(Conductive Hearing Loss):
यह मध्यकर्ण एवं कान के बाहरी हिस्से में खराबी के कारण होता हैं। आवाज कान के अन्दर तक ठीक से नहीं पहुँचती हैं। सभी सुनी हुई आवाज इस प्रकार कमजोर हो जाती हैं या /और आवाज दब जाती हैं। सामान्यतः इस प्रकार के लोग अपने वातावरण की आवाजों का ध्यान रखें बिना नरम आवाज में बोलते हैं।
चालकीय श्रवण दोष होने के कारण:
  • कान की नली में वैक्स का होना
  • बाह्यकर्ण एवं मध्यकर्ण की बीमारियाँ, कान का बहना एवं कान में दर्द के लक्षणों के साथ कान के बाह्यकर्ण एवं मध्यकर्ण में जन्मजात दोष – बाह्य या मध्य कर्ण में दोष या क्षति
  • ऊपरी संबंधित शरीर में संसर्ग
  • मुँह के खड्डों एवं कान की देखभाल न करना
2. संवेदनिक श्रवण दोष (Sensorineural Hearing Loss):
यह कान के अन्दरूनी हिस्सों में या श्रवण स्नायु में चोट लगने या बीमारी के कारण होता हैं। यह कुछ बीमारियों के प्रभाव के कारण भी होता हैं। जैसे कि खसरा (Measles), गलगन्ड (Mumps), मस्तिष्कज्वर (Meningitis), क्षय (T.B.)
कुछ कारण जिनकी वजह से जन्मजात संवेदनिक श्रवण दोष(Congential Sensorineural Hearing Loss)
  • शैशावावस्था से आनुवंशिक बधिरता
  • आर. एच. (R.H) अपरिपूर्णता
  • समय से पहले जन्म -(Premature Birth)
  • जन्म के समय श्र्वासावरोध (Asphyxia) – जन्म होते समय ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चे का नीला पड जाना
  • गर्भावस्था में वायरल संक्रमण
  • गर्भावस्था या गर्भावस्था के प्रथम तीन माह के दौरान एक्स-रे का प्रभाव – गर्भावस्था के प्रथम तीन महीनों में एक्स-रें करवाना
  • मायसिन प्रकार की हानिकारक दवाइयाँ -जैसे स्ट्रेंप्टोमाइसिन
  • अकॉस्टिक न्यूरोमा (श्रवण तंत्र में गाँठ)
3. मिश्रित श्रवण दोष(Mixed Hearing Loss):
यह चालकीय एवं संवेदनिक (Conductive and Sensoineural) श्रवण दोष के जोड के कारण होता हैं। इस प्रकारं के श्रवण नुकसान का एक बडा कारण कान में लगातार लंबे समय तक संक्रमण का रहना हैं, जिसे कि क्रानिक सुपरटिन ओटिटीस मीडिया (Chronic Suppurtine Otitis Media) के नाम से भी जाना जाता हैं। इसमें कान से मवाद (Pus), खून एवं स्वच्छ पानी लगातार निकलते रहता हैं। यह चालकीय दोष (Conductive Loss) के साथ शुरू होता हैं, अगर इस का ठीक समय पर ठीक ढंग से उपचार न किया जाये तो बाद में उसका रूपातर संवेदनिक विकलांगता (Sensorineural Impairment) में हो जाता हैं।
4. मध्यकर्ण श्रवण दोष (Central Hearing Loss):
मध्यकर्ण श्रवणदोष (Central Hearing Loss) चोट के कारण होता हैं, श्रवण-तंत्रिका के संक्रमण के कारण होता हैं या श्रवण-तंत्रिका के अपर्याप्त रूप से विकसित होने के कारण होता हैं या दिमाग में सुनने के स्थान के विकसित न होने के कारण होता हैं। बच्चा सुन पाता हैं, लेकिन सुना हुआ समझ नहीं पाता। कुछ बच्चों को जिन्हें बिना सुननेवाला या सीखने में असमर्थ कहा जाता हैं, वे इस प्रकार के श्रवण-हानि से ग्रसित हो सकते हैं।
5. प्रकार्यात्मक श्रवणदोष
यह मनोवैज्ञानिक कारणों से होता हैं या व्यक्तिगत लाभ के लिए सुनने के लिए किया जाता हैं।

श्रवण-विकलांगता के विभिन्न क्षेत्र

श्रवण-विकलांगता विभिन्न क्षमता में हो सकती हैं। (नीचे लिखी तालिका देखे) कालम 2 श्रवण-विकलांगता की क्षमता (dB HL) कालम 3 में की गणना सुनने की सीमा 500 MHz , 1 khz , & 2 khz ऑ डियोमेटरी से प्राप्त आवाज के औसत (Average) से निकाली जाती हैं। स्पीच रिकग्निशन स्कोर (Speech Recognition Score) (तालिका में कालम चार देखे) स्पीच ऑडियोमेटरी से प्राप्त की जाती हैं। श्रवण-विकलांगता (कालम 5 देखे) की गणना करने के लिए एक पूर्व-निर्धारित सूत्र हैं जो कि परसेटेज (Percentage) में गणना करता हैं। सरकार से मिलने वाली सुख-सुविधा का स्तर श्रवण-विकलांगता के स्तर पर निर्भर करता हैं।
श्रवण-विकलांगता कि क्षमता और स्तर
श्रेणी विकलांगता मात्रा डीबी स्तर स्पीच श्रवण प्रतिशतता
I बहुत ही कम 26 से 40 70 से 100 कम
II (क) आशिक श्रवण 41 से 60 50 से 80 40
II (ख) अधिक श्रवण 60 से 70 40 से 50 51
III (क) सर्वाधिक श्रवण विकलांगता 71 से 90 डीबी अच्छे कान में 40 प्रतिशत से कम अच्छे कान में 71 प्रतिशत
III (ख) पूर्ण श्रवण विकलांगता 91 डीबी और उससे ऊपर अच्छे कान में बहुत ही खराब 100 प्रतिशत

अपने बच्चे की वाचा परखिऐ।

हम रोते हैं, हम बात करते हैं एवं हम सुनते हैं, शब्दों और आवाजों के ससार को। ये कार्य इतने साधारण नहीं हैं जितने कि लगते हैं एक बच्चा बहुत कुछ सुनता हैं, इससे पहले की वह कुछ बोल पाता हैं। हमारी बोलने की क्षमता हमारे इस सुदर ससार के बारें में जिसमें हम रहते हैं, जानने में बहुत मदद करती हैं।
यह हमे एक व्यक्ति की भावनाओं एवं विचारों को समझने में मदद करता हैं और हमे वह कहने में मदद करता हैं, जो हम कहना चाहते है। यह कठिन कार्य बहुतो द्वारा नहीं पूरा हो पाता है। हमे वाचा तथा भाषा गत समस्याओं को जानना चाहिए।

क्या आप या आपका बच्चा इनमें से एक भी समस्या से ग्रसित ह?

  • आपके बच्चे की उम्र 18 महीने हो गई हैं और फिर भी वह कुछ बोलता नहीं या आपको ऐसा लगता हैं कि अपने हम उम्र बच्चों की उम्र के हिसा से नहीं बोलता।
  • ठीक से नहीं बोलता / कुछ प्रकार की आवाज नहीं निकाल पाता जिससे कि लोगों को उसकी बोली समझने में कठिनाई होती हैं।
  • अपनी आवाज कोलेकर कोई समस्या हैं
    अ) यौवनारंभ के बाद पुरुष का स्त्री जैसी आवाज में बोलना
    ब) कर्कश आवाज में बोलना
  • बोलते समय डिसफ्लुअन्सिज जैसे कि उच्चारित आवाजों को बार-बार दोहराना, किसी एक शब्द पर रुक जाना या बात करने का भय। स्ट्रोक या सिर में गंभीर चोट लगने के बाद बोलने में कठिनाई होना या बोलना भूल जाना।
  • वर्तन समस्या जैसे: आदेश का पालन न करना, किसी एक कार्य में लंबे समय तक ध्यान न
    रखपाना, अपने हम उम्र बच्चों की बातों से असंगत बाते एं व्यवहार करना।
यदि ऐसा हो तो ……………
तो वाचा भाषा विज्ञानी की तुरंत सलाह लीजिए।

बच्चों में वाचा एवं भाषा दोष

1. वाचा एवं भाषा का विकास देर से होना :
जब वाचा एवं भाषा बच्चे की उम्र के विकास से असंगत होती हैं, अगर विकास में कोई देरी हो तो निम्न जाँचसूची का उपयोग कीजिए:-
जाँच सूची

तीन महीने तक:

  1. रोनेवाली एवं नहीं रोनेवाली आवाज निकालना
  2. ‘कूऊ ‘ की आवाज निकालना एवं हँसना

छह महीने तक:

  1. खिलौने के बारें में अभिव्यक्ति करता हैं।
  2. जब अकेले होता हैं या जब उससे बोला जाता हैं तो स्वर एवं व्यंजन की आवाजों को दोहराता हैं (बबलाना)।

नौ महीने तक:

  1. आवाज की नकल करने की कोशिश करता हैं।
  2. वयस्कों के बाद अन्य के साथ घुल-मिल कर बातचीत करने की कोशिश करता हैं।

एक साल से डेढ साल तक:

  1. दो शब्दों वाले वाक्यों का अर्थपूर्ण उपयोग करता हैं।
  2. चित्रों को पहचानता हैं।
  3. वयस्कों के साथ चित्रों को देखता हैं।

एक साल / डेढ साल से दो साल तक:

  1. वयस्कों की कृती एवं शब्दों का अनुकरण करता हैं।
  2. शब्दों को या आदेंशों को उचित कृति से प्रतिक्रिया देंना। जैसे कि रुको, नीचे बैठो, वह क्या हैं?
  3. किसी चीज के लिए कुछ सिर्फ शब्द और हावभावों का उपयोग करता हैं।

दो से तीन साल तक:

  1. दो से पाँच शब्दों वाले वाक्यों में बात करता हैं।
  2. साधारण प्रश्नों के उत्तर देता हैं।

निम्न बातों के परिणाम से देरी हो सकती है।

  1. श्रवण दोष ( Hearing loss ) : सौम्य, तीव्र, अति तीव्र श्रवण दोष ।
  2. मंदबुध्दित्व (Mental retardation) : मानसिक रूप से पिछडे बच्चे सीखने में पीछे होते हैं एवं याददाश्त एवं सीखने में कठिनाई महसूस करते हैं। यह उनकी वाचा एव भाषा को के विकास को प्रभावित करता हैं।
  3. हायपर ऍक्टिवीटी /ऑटिजम /अटेन्शन डिंफिशिट : इनकी वजह से उम्र के हिंसाब से वाचा एवं भाषा के विकास में कठिनाई हो सकती हैं।
  4. भाषा एवं वाचा की प्रेरणा का पर्याप्त न होना : जब माता-पिता बच्चों से बातें करते हैं, उनसे बच्चों की वाचा एवं भाषा का विकास होता हैं। हालांकि, वाचा एवं भाषा के विभिन्न पहलुओं से पहचान न होने के कारण बच्चों को सीखाने में कठिनाई महसूस होती हैं।
  5. दिमागी हानि : दिमाग में कुछ विशेष केन्द्र होते हैं जो दूसरों की बोली सीखने एवं भाषा को समझने में मदद करते हैं। दिमाग एवं भाष को समझने में मदद करते हैं। दिमाग के इन हिस्सों को नुकसान बोली एवं भाषा के विकास में देरी पैदा करता हैं।
  6. पढने-लिखने एवं गणित में कठिनाई होना।

कुछ बच्चे जब स्कूली शिक्षा शुरू करते हैं, तो उन्हें कठिनाई आती है जैसे कि:

  • मौखिक रूप से अभिव्यक्त करने में कठिनाई
  • लिखित रूप से अभिव्यक्त करने में कठिनाई
  • दूसरों के वक्तव्य को समझने में कठिनाई
  • जोर से पढने में कठिनाई
  • गणित में कठिनाई
  • व्याकरण की खूब सारी गलतियाँ
  • नए वातावरण के साथ सामजस्य मे कठिनाई
  • दाएँ एवं बाएँ की पहचान में कठिनाई
  • सामान्य भद्दापन, समन्वय का अभाव, कमजोर, बैलेन्स या बहुत बार गिरने की आदत

गलत रूप से शब्द उच्चारण:

  • वयस्कों द्वारा गलत उदाहरण प्रस्तुत करना या सीखना। उदाहरण के लिए एक बच्चा ‘कैट ‘ को ‘टैट’ या ‘सन ‘ को ‘ टन ‘ कहता हैं।
  • तालु एवं जबडे में छेद होना : यह शल्य-क्रिया द्वारा ठीक किया जा सकता हैं। हालांकि, नासाग्र भाग में हवा के दबाव को ठीक न रख पाने की वजह से गलत उच्चरण पैदा होता हैं।
  • कमजोरी, समन्वय का अभाव एवं वाक्‌ स्नायुओं का लकवा : गलत उच्चारण के अलावा, बच्चा निगलने एवं चबाने में भी कठिनाई महसूस कर कता हैं।
  • सौम्य, तीव्र, अतितीव्र श्रवण हानि

स्वर दोष:

कर्कश आवाज : बच्चे बहुत चुस्त और उत्साही होते हैं। वे बोलना, चिल्लाना और चीखते हैं। इससे कारण उनकी आवाज कर्कश हो सकती हैं।

हकलाना:

वाचा प्रवाह में खंड /अंतराल वाचा का प्रभाव को कम करता हैं। वाचा प्रवाह में सौम्य हिचकिचाहट से तीव्र भंग /अंतराल तक की हकलाट हो सकती हैं। यह समस्या बचपन में शुरू होकर बडें होने तक शुरू रह सकती हैं। इसका परिणाम उनके व्यक्तिगत एव सामाजिक विकास /वद्घि पर होता हैं। उन्हें रोजगार मिलने में भी समस्या हो सकती हैं।

वाणी एवं भाषा उपचार

वाणी एवं भाषा विकृतियों का प्रबन्धन एवं उपचार भाषा विज्ञानियों द्वारा किया जाता हैं। दूसरी टीम आडियोलाजिस्ट, सायकोलाजिस्ट, इ.न.टी., पेडिऍट्रिशियन, न्यूरोलाजिस्ट एवं विशेष शिक्षकों की होती हैं। व्यक्ति जिसे वाचा एवं भाषा में दोष हैं का उपचार वाचा-भाषा थेरैपीद्वारा किया जा सकता हैं। वाचा-भाषा थेरैपी लंबी अवधि की प्रक्रिया हैं। उसका तत्काल हल नहीं हैं। इसे निरतर अभ्यास एवं आप और आपके थेरैपिस्ट का काम में समन्वय आवश्यक हैं। प्रबंधन प्रक्रिया में परिवार सदस्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं। परिवार के सदस्यों की भी इ प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका होती हैं।
किसी भी प्रकार की वाचा एवं भाषा के विकृति के लिए, कृपया निकटतम साधारण / निजी अस्पताल के आडियोलाजिस्ट /भाषा थेरैपिस्ट से संपर्क करें।

सम्प्रेषण विकृति के लिए खतरें के कारक

सम्प्रेषण विकृति के लिए खतरें के कारकों की जानकारी रखना काफी सहायक हो सकता है:
  • गर्भावस्था के बाद होने वाले संक्रमण
    – रूबेला, हर्पिज
  • जन्म पर वजन
    – वजन का 1500 ग्राम से कम होना।
  • दवाइयाँ (स्ट्रेप्टोमायसिन आदि)
    – अगर दस दिन से ज्यादा इन दवाइयों का सेवन किया जाए।
  • चूसने या दूध पिलाने में असामान्यत: समय से पहले जन्म लेनेवाले बच्चों में अन्य समस्याएँ होती हैं, तालु या जबडे में विदर होना, चसने, निगलने एवं चबाने में कठिनाई के अलावा वाचा एवं भाषा के विकास में कठिनाई पैदा कर सकता हैं।
  • जन्मजात दोष :
    – क्लेफ्ट लिप / प्लेट; सबमुकोस क्लेफ्ट; बिफिड या युहुल का गायब होना, पिना की अपसामान्यतः हाइड्रो से फाजस, प्रोवेन क्रोमोसोमज सिड्रोम।
  • ब्लड ट्रान्सफ्यूजन /एक्सचेंज
    – जिसके फलस्वरूप तीव्र पीलिया हो सकता हैं।
  • श्रवण दोष संबंधी परिवारिक पाश्र्वर्वभूमि परिवार में श्रवण दोष
  • वाचा समस्याएँ या अध्ययन अधिगत संबंधी परिवारिक पार्श्र्वभूमी यदि बच्चे का नजदिकी परिवार या सगे रिश्तेदार
  • ध्यान रहें – पुनर्वसन प्रक्रिया को शीघ्र पहचान, त्वरित प्रबंधन एवं परिवार और समाज से सहृदय पूरक सहायता की आवश्यकता होती ।

वयस्कों में वाचा एवं भाषा दोष

भाषा दोष
मानव जाति को मस्तिष्क के विभिन्न विभागों से कल्पनाएँ, विचार एवं भावनाएँ, वाचा द्वारा अभिव्यक्त करने का मूल्यवान वरदान प्राप्त हु हैं। मस्तिष्क के वाचा केन्द्र से एवं वाचा अवयव की प्रक्रिया / क्रिया से यह आश्चर्य संभव हुआ हैं। लकवा या सर की गंभीर चोट से मस्तिष्क वाचा केन्द्र को क्षति पहुँचने के कारण से होने वाले भाषा दोष को अफेजिया करहते हैं। ऐसे लोगों को वाचा अभिव्यक्त करने एवं समझे में कठिनाई होती हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें वाचन, लेखन एवं गणन में भी कठिनाई होती हैं। ऐसे लोगों को परिवार के भावनिक आधार और हायता की आवश्यकता होती हैं। वाचा एवं भाषा थेरैपी द्वारा उनके वाचा संप्रेषण कौशल को ठीक करने में सहायता होती हैं।

श्रवण-विकलांगता के कारण

जन्म के पहले

  • बाल्यावस्था में कर्ण बधिरता का परिवारिक इतिहास -पारिवारिक सदस्यों में बहरापन ।
  • निकट संबंधियों में विवाह – निकट-संबंधियों में वैवाहिक रिश्तो का होना जैसे कि चाचा-भतीजी, इत्यादि।
  • खून की बीमारियाँ या RH (आर एच) अपरिपूर्णता।
  • गर्भावस्था के दौरान संक्रामक बीमारियाँ या बीमारियाँ (जैसे कि सिफिलस, जर्मन मीजल्स या रूबेला बुखार के साथ मम्पस)
  • गर्भवती मां की खराब शारीरिक अवस्था।
  • गर्भवती द्वारा अत्यधिक सिगरेट या शराब का सेवन
  • ओटोटाक्सिक दवाइयों का सेवन (वे दवाइयाँ जो श्रवण-संस्थान को नुकसान पहुँचा सकती हैं, अगर अत्याधिक मात्रा में सेवन किया जाए जैसे कि जेन्टामारसिन, अमीकासिन, क्विनेन, प्रिपरेशन इत्यादि)
  • एक्स-रे का अत्यधिक प्रभाव

जन्म के दौरान

  • जन्म ते समय दमघुटी /श्र्वासावरोध (Asphyxia) (जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी के कारण शिशु का साँस लेने में कठिनाई महसूस करना जिससे कि शिशु नीला पड जाता हैं।)
  • जन्म के समय बच्चे का देर से रोना एवं कम रोना
  • जन्म के समय वजन 1200 ग्राम से कम होना

जन्म के बाद

  • परिपक्वता से पहले
  • कान, नाक, चेहरे एवं गले में विकृति का होना
  • जन्म के तुरत बाद पीलिया, तेज बुखार या मिर्गी का होन
  • संक्रामक बीमारियाँ (जैसे कि गोखर खाँसी, मम्पस्‌, मीजल्स, सिफिलस, मेंजानीटिस, वायरल फीवर, टी.बी. आदि)
  • लंबे समय तक अँटीबायोटिक दवाओं का सेवन (विशेषत: उन दवाओं का जो ओटोटाक्सिक के नाम से जानी जाती हैं।)
  • सिर या कान में चोट लगना (दुर्घटना के द्वारा)
  • लगातार तेज आवाज का सुनना उच्च रक्त दाब या मधुमेह
  • अधिक उम्र का होना
  • श्रवण-तंत्रिका में होनेवाली गाँठ
  • कान के मध्य भाग में सक्रंमण का होना, काम से मवाद बहना आदि

आप अपने बच्चे की श्रवण-क्षमता माप सकते हैं।

अच्छे निरीक्षण एवं माप के लिए हमेशा इस बात को निश्चित करिए कि आप आवाज को (ताली या अलार्म घडी) इस प्रकार प्रस्तुत करिए कि बच्चा आवाज सुनकर संवेदना प्रस्तुत करें, न कि इसलिए कि उसने आपको इन वस्तुओं को रखते हुए देखा।
जब आप समय-समय पर मूल्यांकन करते हैं, तो अपने आप से इन प्रश्नों को पूछिए :
श्रवण-क्षमता मूल्यांकन
1. क्या आपका बच्चा तेज आवाज के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करने में असमर्थ है ? (हां /नहीं)
2. क्या आपका बच्चा सूक्ष्म आवाजों के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करने में असमर्थ हैं? (हां /नहीं)
3. क्या आपका बच्चा एक ही दिशा से आनेवाली आवाज के प्रति प्रत्युत्तर दे पाता हैं जैसे कि बाएँ या दाएँ से आनेवाली आवाज? (हां /नहीं)
4. क्या आपके बच्चे ने छह या आठ महीने के बाद ‘बबलिंग’ बन्द कर दिया? (हां /नहीं)
5. क्या आपका बच्चा उन खिलौनों में रुचि नहीं दिखाता जो कि आवाज पैदा करते हैं जैसे कि घंटी, रेटल इत्यादि। (हां /नहीं)
6. क्या आपका डेढ साल का बच्चा अर्थपूर्ण शब्दों, जैसे कि मम्मी, डैडी, बाय-बाय इत्यादि का प्रयोग करने में असफल रहा हैं। (हां /नहीं)
7. क्या आप महसूस करते हैं कि आपका बच्चा साधारण आदेशों को समझ नहीं पाता जैसे कि बाय-बाय जब तक कि आप बोलने के साथ-साथ हावभाव भी नहीं दिखाते? (हां /नहीं)
8. क्या आपका बच्चा सुनते समय आपके चेहरे की ओर देखने पर जोर देता हैं ? (हां /नहीं)
9. जब आप पाँच फीट यह दस फीट की दूरी से बुलाते हैं, तब क्या आपका बच्चा संवेदना दिखाने में असमर्थ हैं? (हां /नहीं)
अगर उपरोक्त किसी भी प्रश्न का उत्तर घ्हाँङ में हैं, तो आपके बच्चे को तुरंत व्यवसायिक मदद की जरूरत हैं।

श्रवणदोष की तुरंत पहचान होना क्यों जरूरी हैं?

जैसा कि पहले कहा गया हैं, श्रवणविकलांगता बच्चे की बोली एवं भाषा को ही दुष्प्रभावित नहीं करती, बल्कि उसके सामाजिक, शैक्षिक एवं व्यक्तित्व विकास पर भी असर डालती हैं।
अगर श्रवण विकलांगता की पहचान जल्द हो जाए तो इन दुष्प्रभावों को जल्द ही कम किया जा सकता हैं, जो कि श्रवण विकलांगता की वजह से होते हैं।

निदान एवं पुनर्वसन के विभिन्न उपाय

दवाई एवं शल्य-चिकित्सा कान के बाहरी एवं मध्य भाग की समस्याओं के लिए उपयोगी हैं। कान बहने की समस्या के लिए, लगातार एवं लंबे समय तक उपचार कराना उसके पूर्णतया ठीक होने के लिए जरूरी हैं। उन परिस्थितियों में जहाँ श्रवण-विकलांगता को पूर्ण रूप से ठीक नहीं किया जा सकता, श्रवण-यंत्रों के उपयोग की सलाह दी जाती हैं।
श्रवण यंत्रों की विस्तृत जानकारी एवं उनके रखरखाव के लिए यहाँ क्लिक करें।
पुनर्वसन प्रक्रिया के अन्तर्गत अच्छे उपयोग के लिए प्रशिक्षण, स्पीच रीडिंग इंस्ट्रक्शन, स्पीच लैंग्वेज स्लिमुलेशन एवं विशेष शिक्षकों की सेवाओं का समावेश हैं। एक विशेष उम्र के बाद नर्सरी या विद्यालय का चयन विशेष शिक्षक की सलाह से किया जाना चाहिए।
पुनर्वसन कार्यक्रम के सफल होने के लिए पहचान एवं रोकथाम एवं परिवार की तुरत पूर्ण सहायता जरूरी हैं। इसलिए श्रवण की समस्या उत्पन्न हो, तुरत कदम उठाना अनिवार्य हो जाता हैं।
श्रवण विकलांगता से ग्रसित पहचाने गए बच्चों के प्रबंध की कार्यतालिका या कार्यसूची :
Action flowchart for management of identified children with hearing impairment.

व्यवसायिक चिकित्सकों द्वारा मदद

ईएनटी विशेषज्ञ

एक ऐसा डॉक्टर (चिकित्सक) जो कि कान नाक एवं गले की बीमारियों के बारें में विशेष जानकारी रखता हैं।

पीडिऍट्रिशन/बालरोगज्ञ्विशेषज्ञ

ऑडियोलॉजिस्ट एवं स्पीच-लैंग्वेज पैथेलॉजिस्ट :

एक ऐसा चिकित्सीय विशेषज्ञ जो कि कर्ण, वाचा एवं भाषा से संबंधित समस्याओं के निदान एवं पुनर्वसन में विशेष रूप से प्रशिक्षित होता हैं।

श्रवण विकलांगता से ग्रसित बच्चों के लिए, यह विशेषज्ञ :

  • श्रवण क्षमता को माप सकते हैं।
  • श्रवण समस्या की पहचान कर सकते हैं।
  • श्रवण यंत्रों का परीक्षण कर सकते हैं एवं उन्हें स्थापित कर सकते हैं।
  • श्रवण यंत्रों के उपयोग के बारें में जानकारी दें सकते हैं।
  • बच्चे के लिए उसकी श्रवण क्षमता के हिसाब से वाचा एवं भाषा विकसित करने के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं।
  • बोलने की समस्या का निदान कर सकते हैं। उदाहरणार्थ स्पीच थेरैपी दें सकते हैं।

बधिरों के लिए विशेष प्रशिक्षक

एक ऐसा शिक्षक जिसने श्रवण विकलांगता से पीडित बच्चों को शिक्षित करने में विशेष प्रशिक्षण हासिल किया हैं।
ये शिक्षक श्रवण दोष से ग्रसित बच्चें के भाषा विकास एवं शिक्षा के लिए विशेष शैक्षिक कार्यक्रम चलाते हैं। वे बच्चें की भाषा क्षमता का सही मूल्यांकन कर सकते हैं एवं आपके बच्चे के लिए विद्यालय के चयन में मदद कर सकते हैं।

अन्य विशेषज्ञ

मनोवैज्ञानिक (Psychologist),व्यवसाय सलाहकार (Vocational Counseller), स्नायुज्ञविज्ञानी
ये सभी व्यवसायिक एवं प्रशिक्षक आपके बच्चे की विशेष जरूरतों के लिए एक समूह में कार्य करते हैं। आपके बच्चे को इनमें से एक या एक से अधिक लोगों की एक ही समय पर जरूरत पड सकती हैं।

श्रवण-यंत्रों के प्रकार

पॉकेट मॉडेल श्रवण यंत्र

जेब में या छाती के स्तर पर रखे जाने वाली थैली (हार्नेस) में रखा जाता हैं। इस श्रवण-यंत्र की बॉडी (body) में माइक्रोफोन (microphone), एम्प्लिफायर (Amplifier) और कंट्रोल्स (Controls) होते हैं। एक कॉर्ड (cord) से विद्युत सिग्नल रिसीवर (Receiver) में भेजा जाता हैं, जो कि इस सिग्नल (Signal) को आवाज में परिवर्तित करता हैं। रिसीवर मोल्ड से जुडा होता हैं, जो कि उसे अपनी जगह पर बनाए रखता हैं।

कान के पीछे लगाया जानेवाला श्रवण यंत्र (Behind the Ear [BTE]):

इस प्रकार का यंत्र कान के पीछे पहना जाता हैं। यह पिना (Pinna) के ऊपर अटक जाता हैं। यह प्लास्टिक नली के द्वारा एक कर्ण साँचे (Ear Mould) से जुडा होता हैं, जो इसे अपनी जगह पर कान में बनाए रखता हैं।

कान में पहना जानेवाला श्रवण यंत्र (In the Ear) ITE :

संपूर्ण श्रवण-यंत्र कान में या कान की नली में होता हैं। हियरिंग एडं (श्रवण यंत्र) को एक कठोर प्लास्टिक के कवच में रखा जाता हैं। इस प्लास्टिक के कवच को कान के आकार के हिसाब से विशेष रूप से बनाया जाता हैं।
 

चश्मे के प्रकार काश्रवण यंत्र (Spectacle Type) :

श्रवण यंत्र के विभिन्न भाग (Components) को चश्मे के फ्रेम के अन्दर फिट किया जाता हैं। यह उन व्यक्तियों के लिए उपयोगी हैं जिन्हें चश्मे के साथ-साथ श्रवण-यंत्र भी पहनना जरुरी हैं।

बोन कंडक्शन(BC) हियरिंग एड:

यह उस समय उपयोग में लाया जाता हैं, जब कान की नली में अवरोध होता हैं या उन परिस्थितियों में जब साधारण आवाज के ऍम्प्लीफिकेशन (Amplification) के द्वारा समस्या हल नहीं हो सकती। एक बीसी वाइबेटर (BC Vibrator) को कान के पीछे मास्टाइड बोन (Mastoid Bone) पर रखा जाता हैं। यहऍम्प्लीफाइड विद्युत सिग्नल को कंपन में परिवतिर्त कर देंता हैं। बीसी वाइब्रेटर का उपयोग बॉडी लेवल, BTE या स्पेक्टल्स हियरिंग एड्‌स के साथ भी किया जा सकता हैं।
श्रवण-यंत्रों का उपयोग हमेशा प्रचलित कर्णसाँचों के साथ ही करना चाहिए। कर्णसाँचा (Ear Moulds) उन साधन को कहते हैं, जो श्रवण-यंत्रों को कान से जोड कर रखते हैं। कर्णसाँचे (Ear Moulds)नरम या कठिन पदार्थ के हो सकते हैं।

श्रवण यंत्र के प्रकार और कीमत
विभिन्न प्रकार के श्रवण-यंत्र जो बाजार में उपलब्ध हैं। श्रवण यंत्र के प्रकार एक नग की लगभग कीमत
अक्टूबर, 2001 को
1. शरीर स्तर टाइप रु.900/- सेलेकर 9900/- रुपयो तक
2. कान स्तर टाइप क) कान के पीछे लगानेवाला
Behind the Ear (BTE)
रु.4000/- से रु.5,000 तक (नॉन -प्रोगामेबल)
ख) स्पेक्टैक्ल टाइप रु.14000/- से 17,500/- रुपयों तक
3. कान में लगाने वाला क) आई टी ई (ITE) (नॉन प्रोग्रामेबल) रु.8000/- से 13,200/- रुपयों
ख) इन द कैनाल (ITE)
(नॉन प्रोग्रामेबल)
रु.8500/- से 20,000/- रुपयों
घ) कप्लीटली इन द कैनाल(ITE)
(नॉन प्रोग्रामेबल)
9500/-से 21,000/- रुपयों

कृपया ध्यान दें:

  • श्रवण-यंत्र विभिन्न क्षमता वाले एवं विशेषताओं (features) वाले होते हैं। एक व्यक्ति के लिए श्रवण-यंत्र जो सही क्षमता एवं विशेषता (feature) वाला हो, वही उसे पूर्ण लाभ देगा। इसलिए श्रवण-यंत्रों की हमेशा आजमाइश करने के बाद ही खरीदना चाहिए।
  • श्रवण-यंत्र श्रवण-क्षति के हिसाब से एक या दोनों कान में लगाए जा सकते हैं।
  • श्रवण-यंत्र से सर्वाधिक लाभ तभी प्राप्त किया जा सकता हैं, जब आपके कान के अनुरूपकर्ण साँचे के साथ श्रवण-यंत्र लगाते हो।
  • श्रवण-यंत्र साधारण रूप से अनालॉग टाइप (Analog Type) के या डिजिटल टाइप (Digital Type) के हो सकते हैं। डिजिटल श्रवण-यंत्र काफी महगे होते हैं।
  • श्रवण-यंत्र बैटरी पर चलते हैं। विभिन्न प्रकार की बैटरियों की कीमत एवं क्षमता निम्नलिखित प्रकार से हैं:
विभिन्न प्रकार की बैटरियों की कीमत एवं क्षमता
बैटरी का प्रकार बैदटरी की अनुमनित औसत क्षमता एक महीने में कितनी बैटरियाँ लगेंगी, यदि कार्यालीन समय के दौरान प्रयोग करते हैं एक नग की लगभग कीमत
1. पेन टार्च सेल (अंग स्तरीय यंत्र) 100 घंटे प्रति सप्ताह रु.7/-
2. बटन सेल 300 घंटे महीने में दो बार रु.30/- से रु.50/-
क) 675 हाइ पावर (मरक्यूरी) Zn O2 Varta 300 घंटे 330 घंटे 25 घंटे महीने में दो बार रु.30/- से रु.50/-
ख) 312 आइ टी ई 415 जिक
एअर के साथ 285-330
प्रति सप्ताह रु.40/-
ग) 13 288 घंटे जिक एअर के साथ हर चार/ पाँच दिनों के बाद रु.40/-

श्रवण-यंत्रों की देखभाल एवं रख-रखाव

श्रवण-यंत्रों की देंखभाल के लिए उपयोगी सुझाव:

  • उसे गिरने से बचाएँ ।
  • श्रवण-यंत्र के ऊपर द्रव न गिराएँ ।
  • श्रवण-यंत्र को ठीक से फिट किया जाना चाहिए – पॉकेट मॉडल को हारनेस (harness) में और बीटीइ को उचित साँचे (moulds) के साथ लगाना चाहिए और जरूरत पडें तो यंत्र सही जगह बना रहें।
  • कार्ड में गाँठ न बाँधे या उसमें गुत्थी न करें ।
  • धूल, गदगी एवं गर्मी से उसे बचाएँ ।
  • अगर श्रवण-यंत्र उपयोग में न हो तो उसमें से बैटरी निकाल लें ।
  • मोल्ड (mould) को धोते समय इअर मोल्ड को रिसीवर से अलग करना न भूलें । रिसीवर पानी के संपर्क में नहीं आना चाहिए ।
श्रवणयंत्र के खराबियों की जाँच-पडताल
समस्या संभावित कारण हल
श्रवण यंत्र से कोई लाभ नहीं बैटरी खत्म हो गयी हो बैटरी बदलिए
बैटरी गलत ढंग से लगायी गयी हो बैटरी को उल्टा करो
कर्णसाँचा मैल से भरा हो कर्णसाँचा की साफ-सफाई करिए
रिसीवर खराब हो रिसीवर बदलिए
स्विच खराब हो मरम्मत के लिए भेजिए
इलेक्ट्रॉनिक खराबी हो मरम्मत के लिए भेजिए
बैटरी से संपर्क टूट चुका हो मरम्मत के लिए भेजिए
कार्ड खराब हो / टूट चुकी हो कॉर्ड बदलिए
श्रवणयंत्र काम कर रहा हैं, पर केवल हवा की आवाज निकाल रहा हैं। यंत्र को ‘टी ‘ स्थिति में स्विच किया गया हो उसे ‘एम ‘ स्थिति में सेट करिए
माइक्रोफोन या कनेक्शन को चोट पहुँची हैं उसे मरम्मत के लिए भेजिए
आउटपुट(लाभ) कम हो या भद्दी /फूटी आवाज आ रही हैं। बैटरी कम हैं बैटरी बदलिए
रिसीवर में विभाजन हैं रिसीवर बदलिए
आधा साँचा अवरोधित हैं मोल्ड की साफ-सफाई करिए
स्विच या स्वर नियंत्रक में दोष /खराबी हैं मरम्मत के लिए भेजिए
यंत्र का रुक-रुक कर चलना कॉर्ड में खराबी हैं कॉर्ड को बदलिए
संपर्क / सॉकेट (socket) में ढीलापन हैं मरम्मत के लिए भेजिए
स्विच में खराबी या गदगी हैं मरम्मत के लिए भेजिए
बैटरी से संपर्क ठीक प्रकार से नहीं हैं ठीक आकार की बैटरी का प्रयोग करें। अगर समस्या का समाधान न हो, तो मरम्मत के लिए भेजिए
यंत्र को हिलाते समय हवा खडखडाती हैं। माइक्रोफोन ढीला हो मरम्मत के लिए भेजिए
पेच /स्क्रू ढीला हो मरम्मत के लिए भेजिए
पहनने पर यंत्र फीडबैक सिग्नल देता हैं। मोल्ड ठीक स्थिति में फिट नहीं हैं नए मोल्ड को ठीक ढंग से फिट किया जाना जरूरी हैं।
कर्णसाँचा ठीक ढंग से पहना नहीं गया हैं ठीक करें
रिसीवर टूटा हुआ हैं रिसीवर को बदलिए
रिसीवर के ऊपर का वॉशर गुम हुआ हैं नया वॉशर लगाइए
वाल्यूम अधिकतम पर रखा गया हैं सही स्तर तक आवाज़ कम करें
ऊँची कालर वाले कपडे के कारण मोल्ड बाहर आ जाता हैं ठीक करें

सावधानियाँ

उपरोक्त दी गई मरम्मत तालिका सिर्फ साधारण समस्याओं के हल के बारे में सुझाव देती हैं। अगर आप उपर दिए गए सुझावों द्वारा समस्या का हल नहीं कर पाते, तो यंत्र को स्वयं के बलबूते पर ठीक करने की कोशिश न करें। किसी व्यावसायिक एवं योग्य इलेक्ट्रॉनिक तकनीशियन के पास जाइए या अपने श्रवण-यंत्र के डीलर या सर्विस एजट के पास जाए और श्रवण यंत्र लंबी अवधि तक उपयोग में लाए जा सकेंगे और अच्छी आवाज देंगे, यदि उनकी नियमित जाँच की जाए एवं उत्पन्न होने वाली समस्या जल्द से जल्द ठीक की जाए।

कर्णसाँचे (Ear Mould) की मरम्मत एवं देखभाल

  1. मोल्ड को साफ-सुथरा रखें एवं उसे गदगी एवं कान के मैल (Wax) से बचाएँ। मोल्ड के अन्दर अवरोध से आवाज के ग्रहण में कमजोरी होती हैं। गदगी की वजह से कान में संक्रमण हो सकता हैं।
  2. कर्णसाँचा साबुन वाले पानी से धोएँ और गदगी को वायर (Wire) से या टूथब्रश (Tooth Brush) से साफ करें। पूरी तरह से सूखने के बाद ही उसका प्रयोग करें।
  3. मोल्ड को रिसीवर (Receiver) के ऊपर कठोरता से न दबाएँ (पॉकेट मॉडल यंत्रों में)। इससे रिसिवर को क्षति पहुँच सकती हैं।
  4. अगर मोल्ड (Mould) में ढीलापन आ जाता हैं, तो उसे बदल दीजिए। चिल्लाती हुई आवाज के कारण बच्चा श्रवण-यंत्र को अपने साधारण वाल्यूम लेवल (Volume Level) पर पहन नहीं पाएगा। छोटें बच्चों में मोल्ड को बार-बार बदलने की जरूरत पड सकती हैं (कुछ परिस्थितियों में महीने में 4-6 बार) क्योंकि कान की नली का आकार एवं नाप उम्र के हिसाब से बदलता रहता हैं।
  5. मोल्ड (Mould) को रिसीवर से बार-बार नहीं निकालना चाहिए। इससे स्प्रिंग का दबाव (Tension) कम होता हैं।
  6. मोल्ड अपनी जगह पर ठीक ढंग से स्थित होना चाहिए ताकि आवाज रिसीव न हो। अगर मोल्ड थोडा सा ढीला हो, तो थोडी सी रूई, स्पज (sponge) या कपडा रिसीवर एवं मोल्ड के बीच में रखने से कसाव आ सकता हैं। इससे आवाज का रिसाव भी कम हो जाता हैं।
  7. अगर मोल्ड को उपयोग में लाने के बाद बच्चे की त्वचा में कोई संक्रमण दिखायी दें, तो तुरंत कान, नाक एवं गला विशेष-ा की सलाह लेनी चाहिए।

सुनने में सहायक (Assistive Listening Devices)

विशेष प्रकार की कुछ प्रणालियाँ विकसित की गई हैं जो श्रवण-विकलांगता से ग्रसित व्यक्तियों की विशेष जरूरतों जैसे कि दूरध्वनि (Telephone) का इस्तेमाल, दूरदर्शन देंखना/सुनना/दरवाजे की घंटी (Door Bell), अलार्म घडी इत्यादि के उपयोग में मदद करती हैं। ये मुख्यत: प्रतिदिन उपयोग में आनेवाली ध्वनि के कार्य में मदद करती हैं।
ये उन प्रणालियों की ओर इशारा करती हैं, जो

  • केवल आवाज को बेहतर बनाती हैं (आवाज जो कि व्यक्ति के लिए उपयोगी हैं), न कि शोर। उपयोगी आवाज को श्रवण-विकलांगता से ग्रसित सुनने वाले को सीधे पहुँचाया जाता हैं।
  • ध्वनि को दृश्य एवं कपित संकेतों में परिवर्तित करती हैं।

ध्वनि को बेहतर करने की प्रौद्योगिकी

ध्वनि को बेहतर करने की तकनीक का उपयोग आवाज को प्राप्त करंने (Receptia) में किया जाता हैं, जैसे कि पर्सनल और ग्रुप हार्डवायर सिस्टम्स, ईन्फ्रारेड सिस्टम्स, लूप इंडक्शन सिस्टम्स, और फ्रीक्वेन्सी मॉड्युलेशन सिस्टम्स।
इन प्रणालियों में, माइक्रोफोन से आनेवाली आवाज (Incoming) को पकड लेता हैं एवं उसे ऊर्जा के दूसरें रूप में परिवर्तित कर देंता हैं। बाद में एक ऍम्प्लीफायर (Amplifier) इस प्रकार से प्राप्त संकेत की तीव्रता को बढाता हैं। अंत में एक रिसीवर (Receiver) इस प्रकार से ऍम्प्लीफाइड सिग्नल (संकेत) को फिर से ध्वनि-ऊर्जा में रूपातरित कर देता हैं जिससे कि श्रवण-विकलांगता से ग्रसित व्यक्ति को वह दिखाई दें।

इंडक्शन लूप सिस्टम्स(Induction Loop Systems)

इंडक्शन लूप सिस्टम्स में ऍम्प्लीफाइड (Amplified) विद्युत संकेत को एक वायर के लूप के जरिए जो कि कमरे की दीवारों में बंद हो सकती हैं या व्यक्ति द्वारा गले में पहनी जा सकती हैं, भेजा जाता हैं। वायर के चारों ओर जो इलेक्ट्रोमॅग्नेटिक क्षेत्र पैदा होता हैं, से श्रवण-यंत्र जो कि “T” (Telecoil) स्थिति में होता हैं, पकड लेता हें एवं उसे ऍम्प्लीफाइड आवाज में परिवतिर्त कर देता हैं। इस ऍम्प्लीफाइड आवाज को श्रवण-विकलांगता से ग्रसित व्यक्ति सुन लेता हैं।

1. माता-पिता के लिए पत्राचार पाठ्यक्रम

माता-पिता बच्चों के पहले एवं नैसर्गिक शिक्षक होते हैं एवं प्रायः हमेशा सभी बच्चे भाषा अपने माता-पिता से सीखते हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों में संप्रेषण एवं भाषा कौशल विकसित करते समय आनेवाली कठिनाइयों को सुलझाने में सहायता हेतु पत्राचार पाठ्यक्रम की रचना की गई हैं। अभिभावकों को भाषा विकास में मदद के लिए घर-पर अध्ययन की योजना प्रदान की जाती हैं, जिससे घर पर वे भाषा को विकसित करने में सहायक वातावरण बना सकें। बच्चे की शैशवावस्था 0 से 5 साल तक भाषा ग्रहण करने के लिए संवेदनशील समय हैं।
इस समय ऐसे पत्राचार पाठ्यक्रम बहुत संस्थानों में विविध भाषाओं में उपलब्ध हैं। इनमें से कुछ संस्थाओं के पते इस प्रकार हैं

  1. कानमंत्र, एम. डी.डी.
    ए वाइ जे एन आइ एच एच, के. सी. मार्ग,
    बान्द्रा रिक्लेमेशन.
    बान्द्रा (पश्चिम),मुंबई – 400 050.
    (मराठी के लिए)
  2. सेन्ट्रल इन्स्टिट्यूट फॉर द टीचर्स ऑफ द डेफ,
    म्युनिसिपल स्कूल बिल्डिंग, तीसरी मंजिल,
    वाइएमसीए स्वीमिंग पूल के सामने,
    फारूख उमरभाई पथ,
    अग्रीपाडा, मुंबई – 400 011.
    (मराठी के लिए)
  3. जॉन ट्रेसी क्लिनिक ,
    806, वेस्ट ऍडम्स बेल्वार्ड,
    लॉस एजिल्स,
    कैलिफोनिर्या – 90007.
    (अंग्रेजी के लिए)
  4. श्रवण वाणी सुधार केन्द्र
    ऑल इंडिया इन्स्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेस,
    असारी नगर, नई दिल्ली – 1100291.
    (हिंन्दी के लिए)

लगभग सभी पत्राचार पाठ्यक्रम अभिभावकों के लिए नि:शुल्क हैं।

2. अभिभावक एवं शिशु कार्यक्रम

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य श्रवण-विकलांग बच्चों की बचपन में ही पहचान करना हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संबंधित बच्चे के समग्र विकास का निरीक्षण करनासंकल्पना का उद्देश्य छोटे बच्चों को भाषा सीखने में प्रेरक वातावरण से परिचित कराना हैं, ताकि श्रवण-विकलांग बच्चे प्राकृतिक भाषा ग्रहण कर सकें। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अभिभावक को सक्षम बनाना हैं। जैसा की नाम से विदित हैं, इसमें अभिभावक एवं बच्चे साथ-साथ सहभागी होते हैं एवं अभिभावकों को उन विभिन्न विधियों द्वारा परिचित कराया जाता हैं, जिससे उनके बच्चे भाषा ग्रहण कर सकें, अगर इस अवस्था में वह विकसित नहीं हुई हैं तो इस अवस्था में भाषा का पर्याप्त रूप से विकसित न होना, आगे जाकर उनके विधिवत शिक्षण में बाधक बन सकता हैं।

इस प्रकार के अभिभावक एवं शिशु कार्यक्रम भारत में कुछ केन्द्रों पर ही उपलब्ध हैं। कुछ केन्द्र इस प्रकार से हैं :

  1. ए.वाइ.जे.एन.आइ.एच.एच
    के.सी. मार्ग,
    बान्द्रा रिक्लेमेशन,
    मुंबई – 400 050.
  2. मैत्री इनफन्ट ट्रेनिंग सेटर ,
    म्युनिसिपल बिल्डिंग,
    तीसरी मंजिल,
    वाइएमसीए स्वीमिंग पुल के सामने,
    फारूक उमरभाई पथ,
    आग्रीपाडा,
    मुंबई-400 011.
  3. बाल विद्यालय स्कूल फॉर यंग डेंफ चिल्ड्रेन,
    14, फस्ट क्रॉस स्ट्रीट,
    शास्त्री नगर,
    चेन्नई – 600 020.
  4. विकास विद्यालय फॉर द डेंफ,
    ए-5, मेहता अपार्टमेंट,
    प्रोसर अगाशे रोड, दादर,
    मुंबई – 400 028.

अभिभावकों के लिए संपर्क प्रशिक्षण कार्यक्रम

भारत में श्रवण-विकलांग बच्चों की शिक्षा में अभिभावक एवं शिक्षकों की सहभागिता को ध्यान में रखते हुए, अभिभावकों के लिए समय-समय पर संपर्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। इन कार्यक्रमों का आयोजन विशेष स्कूलों में किया जाता हैं। इन कार्यक्रमों को बच्चों की उम्र के हिसाब से इस प्रकार निर्धारित किया जाता हैं कि उनके अभिभावकों को उचित प्रशिक्षण दिया जा सके एवं वह प्रशिक्षण उनकी स्कूली शिक्षा या कक्षा में दी जानेवाली शिक्षा का अनुपूरक हो।
नियमित रूप से इन कार्यक्रमों का आयोजन इनके द्वारा किया जाता हैं :

  1. ए.वाइ.जे.एन.आइ.एच.एच
    के.सी. मार्ग,
    बान्द्रा रिक्लेमेशन,
    मुंबई – 400 050.
  2. के. डी. एन. श्रुति स्कूल फॉर द डेंफ,
    जुहूकर मार्ग,
    चंदन सिनेमा के पीछे,
    जे.वी.पी.डी. स्कीम,
    मुंबई 400 049.
  3. सेन्ट्रल इन्स्टिट्यूट फॉर द टीचर्स ऑफ द डेफ,
    म्युनिसिपल स्कूल बिल्डिंग, तीसरी मंजिल,
    वाइएमसीए स्वीमिंग पूल के सामने,
    फारूख उमरभाई पथ,
    अग्रीपाडा, मुंबई – 400 011.
  4. बाल विद्यालय स्कूल फॉर यंग डेंफ चिल्ड्रेन,
    14, फस्ट क्रॉस स्ट्रीट,
    शास्त्री नगर,
    चेन्नई – 600 020.
  5. लिटल फ्लावर कॉन्वेट हायर सेडरी स्कूल फॉर डेफ,
    127, जी. एन. रोड,
    कॅथेड्रल पी.ओ.,
    तमिलनाडु
    चेन्नई – 600 006.

4. पूर्व प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम (प्रीस्कूल प्रोग्राम)

सामान्य स्कूल में समेकित शिक्षा

उन बच्चों की जिनका निदान एवं रोक-थाम बहुत ही आरभिक अवस्था में कर लिया गया हैं और विशेषकर जो क्रियात्मक भाषा सीख चुके हैं, उन्हें नियमित नर्सरी स्कूल में सम्मिलित किया जा सकता हैं। हालाकि, विशेष शिक्षकों एवं रिसोर्स शिक्षकों की मदद की जरूरत पडेंगी, ताकि बच्चा लिखने एवं पढने के कौशलों का विकास हो सके एवं उसकी भाषा उत्तरोत्तर रूप से समृद्घ हो सके।

विशेष स्कूलों में प्रथक करना

ऐसे बच्चे, जिनका निदान विलम्ब /देस से हुआ हैं या जिन बच्चों की क्रियात्मक भाषा का विकास नहीं हुआ हैं उन्हें विशेष प्री-स्कूल में दाखिल किया जाता हैं। विशेष स्कूलों में विशेष शिक्षक, इन बच्चों की भाषा की नीव मजबूत बनाने में सहायता करते हैं जिससे उनकी आगे की प्राथमिक एवं माध्यमिक औपचारिक शिक्षा आसानी से पूरी हो सके यह बच्चे की अध्ययन सफलता (उपलब्धि) पर निर्भर हैं कि उसे समेकित स्कूल या विशेष स्कूल में दाखिल करना चाहिए।
यह बच्चे की प्रगति के आधार पर विशेष विद्यालय में या नियमित विद्यालय के साथ संयुक्त रूप से हो सकता हैं। विशेष विद्यालयों के शिक्षक संप्रेषण की कला को विकसित करने के लिए विविध गतिविधियों /तंत्रों का सहारा लेते हैं। बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विशेष प्री-स्कूल पाठ्यक्रम की रचना की जाती हैं एवं ऐसी गतिविधियों का संचालन किया जाता हैं जैसे निर्देशित गतिविधियाँ, कथा कथन, मार्गदर्शित नाटक इत्यादि जिससे कि श्रवण-विकलांग बच्चे अभिव्यक्त करनेवाली भाषा प्री-स्कूल में सीख सकें।
विशेष प्री-स्कूल कार्यक्रम ए. वाइ. जे. एन. आइ. एच. एच., मुंबई में एवं इसके आंचलिक केन्द्रों में जो कि पूरे देश में फैले हैं, चलाए जाते हैं। ए. वाइ. जे. एन. आइ. एच. एच. में अल्पवयस्क /छोटे श्रवण विकलांग बच्चों के लिए आदर्श प्री-स्कूल अभ्यासक्रम उपलब्ध हैं।

5. प्राथमिक विद्यालय

नियमित विद्यालयों में समेकित शिक्षा

समेकित प्री-स्कूल कार्यक्रम के बच्चे या विशेष स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चे नियमित प्राथमिक विद्यलयों में दाखिल किए जाते हैं। श्रवण-विकलांग बच्चे उसी पाठ्यक्रम का अध्ययन करते हैं, जो कि राज्य में स्टेट बोर्ड ऑफ स्पेशल एज्युकेशन द्वारा निर्धारित हैं, लेकिन उन्हें भाषा एवं मौखिक मूल्यांकन में छूट दी जाती हैं। विशेष शिक्षक या स्रोत शिक्षक द्वारा विशेष सहायता उन्हें अपने सुनने वाले सहपाठियों के समकक्ष प्रगति करने में मदद करती हैं।

विशेष विद्यालय में अलग से शिक्षा

वे बच्चे जो अभी तक अच्छी भाषा एवं संवाद की कला नहीं विकसित कर पाए हैं, एवं जिन्हें लिखने एवं पढने में सहायता की आवश्यकता हैं, वे अपनी प्राथमिक शिक्षा विशेष स्कूल में जारी रखते हैं। विशेष शिक्षक वैयक्तिक शैक्षणिक कार्यक्रम बनाते हैं एवं विशेष पाठ्यक्रम विकसित करते हैं, ताकि विशेष बच्चों की वैयक्तिक जरूरतें पूरी हो सकें। स्टेट एज्युकेशन बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अलावा, विशेष शिक्षक उन गतिविधियों की जिम्मेदारी लेते हैं, जिससे कि ग्रहण करने वाली एवं अभिव्यक्त करने वाली भाषा मजबूत बन सके।

माध्यमिक विद्यालय

नियमित विद्यालयों में समेकित शिक्षा

समेकित प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे या विशेष प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे माध्यमिक विद्यालयों में प्रवेश ले सकते हैं। विशेष स्कूल में माध्यमिक विभाग बहुत से कारणों से उपलब्ध नहीं हो सकता हैं। बहुत बार, विशेष स्कूलों को राज्य सरकार द्वारा माध्यमिक विभाग चलाने की अनुमति नहीं मिल पाती हैं। इसलिए बच्चों को समेकित विद्यालयों में प्रवेश लेना पड सकता हैं। इस अवस्था में विद्यालय छोडने की घटनाएँ अधिक होती हैं। अभिभावकों को सावधान रहने की चेतावनी दी जाती हैं एवं शिक्षण बाधित न हो, इसलिए विभिन्न विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी जाती हैं।
पढाया जानेवाला पाठ्यक्रम स्टेट बोर्ड ऑफ एज्युकेशन द्वारा पूर्वनिर्धारित हैं एवं श्रवण-विकलांग बच्चों को भाषा में छूट प्रदान की जाती हैं एवं भाषा के बदले में दूसरें वैकल्पिक विषयों का चुनाव करना पडता हैं।

विशेष विद्यालय में अलग से शिक्षा

बच्चे जो कि एक या अलग कारणों के कारण नियमित प्राथमिक विद्यालयों में दाखिल नहीं किये जा सके, वे अपनी माध्यमिक शिक्षा विशेष स्कूलों में पूरी करते हैं। स्टेट बोर्डं ऑफ एज्युकेशन के माध्यमिक पाठ्यक्रम के अतिरिक्त, उन्हें भाषा में छूट मिलती हैं। बहुत से विशेष स्कूलों में व्यवसाय-पूर्व ज्ञान देंने की भी व्यवस्था हैं।

निरतर शिक्षा

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयों उन बच्चों/व्यक्तियों को शैक्षणिक मौका प्रदान करता हैं, जो आगे पढना चाहते हैं, लेकिन नियमित स्कूल में पढना संभव नहीं हैं। यह विकलांग बच्चों को आगे बढने का मौका प्रदान करता हैं, विशेषकर उन बच्चों को जो स्कूल छोड चुके हैं। इस उद्देश्य के लिए, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय ने विशेष मान्यता प्राप्त केन्द्रों की स्थापना की हैं, जिससे कि दुर्भाग्यशाली लोगों को विभिन्न केन्द्रों में पढने में मदद मिले। अली यावरं जंग नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द हियरिंग हैंन्डीकैप्ड एक ऐसा ही मान्यताप्राप्त केन्द्र हैं, जो कि श्रवण-विकलांग बच्चों की शिक्षा जारी रखने की जरूरत को पूरा करता हैं। यहाँ अंग्रेजी और हिंदी माध्यम में दो कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं – मूलभूत पाठ्यक्रम एवं माध्यामिक शिक्षा ।

अ) फाऊन्डेशन कोर्स (मूलभूत पाठ्यक्रम)
मूलभूत पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम पांचवी कक्षा तक शिक्षा होना आवश्यक हैं। मूलभूत पाठ्यक्रम समकक्षता आठवीं कक्षा के बराबर हैं। इसमें सार्वजनिक परीक्षा, अंक या प्रमाणपत्र नहीं हाेते। पांच विषयों का प्रस्ताव हैं जिसमें ग्रुप ‘ए ‘ से एक या दो भाषाएँ और शेष 3 विषय ग्रुप ‘बी ‘ से लिए जा सकते हैं।
ब) माध्यमिक शिक्षा (Secondary Education)
पाठ्यक्रम प्रवेश के लिए कम से कम कक्षा आँठ तक शिक्षा या नेशनल ओपन स्कूल से फाउन्डेशन कोर्स आवश्यक हैं। माध्यमिक शिक्षण कक्षा दस के बराबर हैं। दिए जाने वाले विषयों में कोई भी एक भाषा का समावेश हैं एवं पाँच विषयों में व्यावसायिक विषयों के लिए वैकल्पिक चुनाव भी उपलब्ध हैं।
सार्वजनिक परीक्षा ली जाती हैं एवं पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर माध्यमिक पाठशाला प्रमाणपत्र भी दिया जाता हैं।
इसमें विशेष सुविधा यह हैं कि विद्यार्थी एक साल में एक ही विषय की परीक्षा दें सकता हैं अर्थात पांच वर्ष के प्रत्येक वर्ष में एक विषय के हिसाब से विद्यार्थी अपनी गति एवं सुविधा के हिसाब से अध्ययन करते हुए पाठ्यक्रम पूर्ण कर सकता हैं।

उच्च माध्यमिक शिक्षा

श्रवण-विकलांग जो कि माध्यमिक शिक्षण किती मान्यता-प्राप्त बोर्डं ऑफ एज्युकेशन द्वारा या संयुक्त नियमित माध्यमिक स्कूल द्वारा या विशेष स्कूल द्वारा या राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय द्वारा सफलता पूर्वक पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें उच्च माध्यमिक स्कूल में प्रवेश दिया जाता हैं। श्रवण-विकलांग बच्चे भाषा में छूट के अधिकारी हैं एवं वैकल्पिक विषयों का चुनाव कर सकते हैं।

पृथक उच्च माध्यमिक शिक्षा – विशेष पाठशाला

विशेष विद्यालय श्रवण-विकलांग बच्चे जो कि माध्यमिक शिक्षण किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड ऑफ सेकेन्डरी एज्युकेशन द्वारा या संयुक्त नियमित माध्यमिक स्कूल द्वारा या विशेष स्कूल द्वारा या राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय द्वारा पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें उच्च माध्यमिक विशेष स्कूल में प्रवेश दिया जाता हैं। इस प्रकार के विशेष स्कूल इस समय केवल चेन्नई में हैं :

  1. लिटल फ्लावर कान्वेट हायर सेकेन्डरी फॉर डेफ
    127, जी. एन. रोड, कॅथेड्रल पी.ओ.
    तमिलनाडु,
    चेन्नई – 600 006.
  2. सेट लुईस इन्स्टिट्यूट फॉर डेफ एन्ड ब्लाइन्ड
    कॅनल बैंक रोड,
    गांधी नगर, अद्यार,
    चेन्नई – 600 020.

महाविद्यालय शिक्षण

श्रवण-विकलांग व्यक्ति जो कि माध्यमिक शिक्षण समेकित या विशेष स्कूल से जो कि बोर्ड ऑफ एज्युकेशन से मान्यता प्राप्त हैं, पूर्ण कर चुके हैं, वे उच्च शिक्षा के लिए नियमित महाविद्यालय अथवा आईजीएनओयू (इन्दिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवसिर्टी) में प्रवेश ले सकते हैं।

विशेष रूप से अलग कॉलेज भी यहाँ उपलब्ध है:

  1. सी.एस.आई वोकेशनल हाई स्कूल फार द डेंफ
    पोस्ट वालाकोम,
    काट्टरकारा, जिला क्विलॉन,
    केरला.
  2. सेंट लुईस इन्स्टिट्यूट फार डेफ अेन्ड डेफ ब्लाइन्ड,
    कॅनल बैंक रोड,
    गाँधी नगर,
    अद्यार, चेन्नई – 600 20.

एनजीओ के श्रवण बधितों हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र

व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र
संगठन का नाम व पता व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम
सोसायटी फॉर एजुकेशन आफ डेफ एण्ड ब्लाइड, विजियानगरम, आन्ध्र प्रदेश बुक बाइडिग (जिल्द साजी) माडर्न ड्रेस मेकिंग
आन्ध्र प्रदेश पिछंडी जाति, कमजोर वर्ग तथा विकलांग युवक कल्याण सोसायटी, डी.नं.: 38-6-34, गोपाल नगर, तीसरी लेन, ओन्गोले, जिला प्रकाष्टम, आन्ध्र प्रदेश लैदर बैग निर्मिति
खादी व ग्रामोद्योग आयोग, बहुआयामी प्रशिक्षण केन्द्र, डोईमुख, अरुणाचल प्रदेश केन बाम्बू
खादी व ग्रामोद्योग आयोग, जी.एन.बी. रोड, अम्बारी, गुवाहाटी, आसाम केन बाम्बू
बधिरों हेतु सी.एस.आई.स्कूल, केरल स्ट्रा क्राफ्ट
एसोसिएशन फार वेलफेयर आफ दि हेन्डीकैप्ड, पोस्ट नं.: 59, एस.एम. स्ट्रीट, कालीकट – 673011, केरल पोल्ट्री फार्म / गारमेन्ट मेकिंग
ट्रापिकल हैल्प फाउन्डेशन आफ इन्डिया, कुन्नमकुलम, केरल टेलरिंग तथा गारमेन्ट मेकिंग
रोटरी डेफ स्कूल, पो.आ.टिलवानी – 416115, इचलकरनजी, महाराष्ट्र पावरलूम
खादी व ग्रामोद्योग आयोग (जी.बी.कोरा इन्स्टीट्यूट आफ विलेज इन्डस्ट्रीज) फाइबर प्रोसेसिंग
श्रीराम एजूकेशन सोसायटी, खामगांव, महाराष्ट्र स्पिनंग (कताई) / वीनिंग (बुनाई)
शार्प सिस्टम, सुतारवाडी, पुणे, महाराष्ट्र मोटर वाइडिंग, पाउडर कोटिंग, पेन्टिंग एवम्‌ शीट मेटल विनिर्माण;
अंकुर ग्रामीण विकास संस्थान, 71, पनज़ारा सोसायटी, डाक कुसुम्बा, तह व जिला धुले मोटर साकिल व मोपेड मरम्मत कार्य
नेहरू सेवा संघ, डाक: बानपुर, जिला पुरी (उडीसा) केन तथा बाम्बू कार्य
बधिर बाल कल्याण समिति, डाक व जिला भीलवाडा, राजस्थान कम्प्यूटर पाठ्यक्रम
विशाल साहित्य शिक्षा व कला निकेतन, 245/32, भावना सिंह, शिवाला रोड, प्राग बाजार, लखनऊ, उत्तर प्रदेश चिकन तथा लोकल क्राफ्ट
ग्राम विकास सेवा संस्था, जगदीशपुर, जिला सुलतानपुर, उत्तर प्रदेश लीफ प्लेट मेकिंग
आदर्श शिक्षा प्रसारक समिति, गरूर, अलमोडा, उत्तर प्रदेश लीफ प्लेट मेकिंग
रामकृष्ण मिशन सेवाआम, कन्टई, मिदनापुर, प.बंगाल ग्रामीण कृषि अभियान्त्रिकी
आदर्श अप्रतिबन्धि समिति सारे टिने मोर (लेनिन सारनी) बलूरघाट दक्षिण, दिनामुरे, प.बंगाल बागवानी,जूट कारपेट व मोक्षा (मैट)
डान बास्को सेल्फ इम्प्लायमेन्ट रिसर्च, भट्टानगर, हावडा कम्प्यूटर पाठ्यक्रम
विवेकानन्द आदिबासी कल्याण समिति, चमटागरा, बाकुरा, पं.बंगाल टेराकोटा तथा डोमरा
जलपईगुडी वेलफेयर आर्गनाइज़ेशन, कलम रोड, पी.डी.कालेज के सामने, जलपईगुडी, प. बंगाल वुड क्राफ्ट
वाक व क्षवण संस्थान तथा अनुसंधान केन्द्र, 10, माण्डेविला गार्डन्स, कोलकाता – 700019 क्ले माडलिंग
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